मेने कुछ सुना था
क्या वो तेरी पायल का शोर था
में जिस और चला
तेरा साया भी , उस और चला था....
बहुत चाहा रोक लूँ,
दिल की धडकनों को,
पर दिल मचल पड़ा था .....
कुछ सिसकियों की आहट थी
कुछ अश्कों की वरिश थी ....
तुझे देखा ,तुझे छुआ .
कितना हंशी वो पल था ..
उतना ही हंशी आज है ,
जितना हशी तू कल था ..
यूँ ही हवा में उझल पड़ा
तू नहीं सिर्फ तेरा वो, एक साया था
क्या वो तेरी पायल का शोर था
में जिस और चला
तेरा साया भी , उस और चला था....
बहुत चाहा रोक लूँ,
दिल की धडकनों को,
पर दिल मचल पड़ा था .....
कुछ सिसकियों की आहट थी
कुछ अश्कों की वरिश थी ....
तुझे देखा ,तुझे छुआ .
कितना हंशी वो पल था ..
उतना ही हंशी आज है ,
जितना हशी तू कल था ..
यूँ ही हवा में उझल पड़ा
तू नहीं सिर्फ तेरा वो, एक साया था
//...भावेश गुर्जर ..//
